ख्वाहिशें

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khwaishein

खामोशियों में आज हम भी गुम होकर देखेंगे,
गुमनामी के अंधेरो में आज हम भी जी कर देखेंगे…
क्या मज़ा आता है तुझे अपनी ख्वाहिशें मारने में,
आज तेरी राहो पर हम भी चल के देखेंगे…

3 COMMENTS

  1. Don’t get too much lost in your hush. The darkness of anonymity gives brutal pain, and its not advisable for soft and kind heart people out there.

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