Zindagi

zindagi

जाने फिर क्यूँ उलझ रही है ज़िंदगी,
जाने किस मोड़ मुड रही है ज़िंदगी…
मै नये पन्ने लिख रही हूँ,
फिर क्यूँ पुराने पन्ने पलट रही है ज़िंदगी…

MAA

maa

मुझे रोशिनी से भरे सवेरे देने के लिए,
ना जाने उसने अपने वक़्त से कितने लम्हे मेरे नाम कर दिए…
मेरे कदमो को बढ़ाने के लिए
ना जाने कितनी दफ़ा उसने अपने कदम थाम लिए…
सलाम है माँ तुझे
मेरे सपनो के लिए तूने अपने सपने कुर्बान कर दिए…

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Keep Focus On Your Goal

goal

जब कदम डगमगाने लगे
मंजिले धुंधली नज़र आने लगे…
वो ठोकरे याद कर लेना जो लगी है तुम्हे
वो बंदिशे जिन्होने रोका है तुम्हे…
रूह फिर हौसले से भर जाएगी
मंज़िल पहले से भी ज़्यादा साफ़ नज़र आएगी….